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Wednesday, February 8, 2012

चहचहाती चिड़िया कि चहक में मुझे दिखे भगवान...
जब जब आँगन में वो चहकती, ह्रदय भरा मुस्कान ...
देखूं इश्वर नन्हे बच्चों कि किलकारियों में, 
बोलियाँ छिपी उनकी तोतली सी बोली में...
बालक रूप में घर आओ मेरे, मेरे निरंकार(शिव)महान|
सत्यम शिवम् सुन्दरम है, सत्य प्रकृति का हर रूप...
सत्य मृत्य है, सत्य प्रकृति है, प्रकृति सुन्दरतम रूप...
इश्वर दिखे शांत प्रकति कि हर छटा में...
रौद्र सूर्य धूप में, गरजती बरसती हर घटा में...
गंगा कि पावन लहरों में, परबत कि ऊंचाई में..
मासूम पशुओं में, दो मुझे बस प्रभु ढाई आखर का ज्ञान................रामेश्वरी

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