Search My Blog

Thursday, January 24, 2013

क्या करोगे जख्मों को हमारे जानकार ।
बहुत रो पड़ोगे, अपने दिए जख्म को पहचानकर ।।रामेश्वरी
वो रो रो कर गम ज़माने में सरेआम बयाँ करते हैं ।
कोई पूछो दर्द हमसे, हम अपने लफ़्ज़ों से अपने लब सिया करते हैं ।।रामेश्वरी
अजज़ गज़ब है माँ ।
नन्हे से बच्चे की किलकारियों का .
सबब है माँ ।
चैन सुकून से सोया है ..
उसके लिए रब है माँ ...

Tuesday, January 15, 2013

क्यूँ गुमसुम रहूँ मैं, ज़रा खुद में उमंगों की स्याही भर लूं मैं।।
ज़ज्बात क्यूँ दफ़न करूँ, मुझसे ही बीता इतिहास बोलता है ।।
ज़ज्बात दबे हैं सीने में, उफनते हैं जब कोई पन्ना खोलता है ।।
खौफ जिन्हें मेरी रोशनाई से, वो मुझे रहने को खामोश बोलता है ।। रामेश्वरी
सेठ देकर चंद सिक्के, सेठानी की उतरन , खुद को खुदा मान लेता है ।
ढांप लिया है तन कतरन से, वो फिर भी मेरी अस्मिता पर झांक लेता है ।रामेश्वरी

Monday, January 14, 2013

लोग जाएँ मंदिर मस्जिद, मैं क्यूँ जाऊं ?
वो सोया गोद में मेरी, रोज पालना झुलाऊँ ।। 

Sunday, January 13, 2013

मैं कुर्सी ..

मैं कुर्सी ..
कहने को है पाँव चार ।
बैठी देखो कैसी लाचार ।
जो आया ..
आसीन हुआ ..
जुबान पे ताला ..
कसा हुआ ..

ईमान को गोद दे न पाऊँ ।
बेईमान डट कर जमा हुआ ।
जी आया कभी-कभी ।
तोड़ दूं पैर खुदी के मैं ..
मैं आसीन वहीँ की वहीँ ।
लगा बोली मेरी ।
बेईमान सारा जहां घुमा हुआ ।

मैंने ही रची ..
रामायण, महाभारत यहाँ ।
मैं ही गुमनाम रही ।
सोचो।।
क्या मैं ही भगवान् नहीं ?