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मौनी कागज़।
कलम इंकलाबी।
मिटा अज्ञान।
गुरु निष्काम।
श्यामपट है श्याम।
भोर शारदे ?
हे कलजुगी।
शिष्या ब्याह रचाए ।
पद भ्रष्ट हैं ।
मूल्य नष्ट हैं ।
वाग्देवी लज्जाये हैं ।
रिक्त कक्षाएं।
छड़ी अड़ी है ।
परीक्षा की घड़ी है ।
हे जड़मति !
खुली किताब ।
निगाह चहुँ ओर ।
दूर है भोंर । रामेश्वरी। ३०/८/१३
मैं हूँ अज्ञानी ।
विद्या बहता पानी ।
रोके ना बंधे । रामेश्वरी। ३०/८/१३
