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Monday, July 18, 2011

मैं जानवर हूँ इंसानियत मेरा धर्म नहीं
ना मैं हिन्दू सिख मुस्लिम नहीं...नहीं 
मैंने भी अपना बहुत कुछ खोया है 
जिसमे मेरा कोई करम नहीं ...
कहीं सर्कस मैं पेट भरा इंसान का 
कहीं जान उसकी रक्षा मैं गवाई है
या कहें इंसानियत मैंने ही निभाई है
फिर क्यूँ बेक़सूर होके ..अपने खोके
मैंने यह सजा पायी है .....रामेश्वरी

Monday, July 11, 2011

कहीं  तन  ढकने  को   कपड़ा नहीं ...
कहीं  नंगा  तन  बाजार  में  बिकता  है ..
कहीं  आराधना  का  अभाव  है ..
कहीं मुन्नी  शीला  में  रब  दिखता है ..
जितने  चलचित्र  उतने   प्रेम ......
प्रेम  कोडी  के  भाव यहाँ  बिकता  है ...
जो  देश  पर    शहीद  हुए  उन्हें  याद  कौन  करे ...
जब  नाचता  हुआ  जमूरा सबको  हीरो  दिखता  है .....(रामेश्वरी )

Sunday, July 3, 2011

कन्या

मैं एक  नन्हा  फूल  हूँ ..
मैं  नहीं  तुम्हारी  भूल  हूँ  ...

फिर  क्यूँ   दी  मुझे  धूल?
चुभ  रही  "रामेश्वरी " ह्रदय  मैं  शूल 

तुम्हारा  ही  अंग  हूँ ..अंग  प्रत्यंग  हूँ ..
इस  अंग  को  क्यूँ  खंड  खंड  किया ..?

मैं  थी  ईश्वर का  वरदान ..
अभिशाप  पर  क्यूँ  घमंड  किया ?

दर - दर भटको  जब  जीरण अवस्था  में..
सोचो  शायद  हमने  था  ये  क्या  किया  ?