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Monday, July 18, 2011

मैं जानवर हूँ इंसानियत मेरा धर्म नहीं
ना मैं हिन्दू सिख मुस्लिम नहीं...नहीं 
मैंने भी अपना बहुत कुछ खोया है 
जिसमे मेरा कोई करम नहीं ...
कहीं सर्कस मैं पेट भरा इंसान का 
कहीं जान उसकी रक्षा मैं गवाई है
या कहें इंसानियत मैंने ही निभाई है
फिर क्यूँ बेक़सूर होके ..अपने खोके
मैंने यह सजा पायी है .....रामेश्वरी

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