पड़ोस में बसता है कौन..
दोस्ती, दुश्मनी में सस्ता है कौन ...?
देखा नहीं कभी ..
पड़ोस में लाश बन सड़ता है कौन ?
कितना गरीब वो,प्रकृति का उसे एहसास नहीं..
शीतल हवा, सर्द धूप होती है क्या, समय पास नहीं ..
जब हो पास लिमोजीन, पैदल राह चलता है कौन?
साए से अपने उन्हें डर लगता है क्यूँ?
डाकू के घर डाकू घुसा है कहीं?
ज़रा सी आहट में रातों को देखो ..
इस मोहल्ले में निंद्रा से जगता है कौन ?
चंद कागज़ के टुकडो की खातिर ..
लहू बहाया ये किसने रिश्तों का ?
कौन फिर भी बेचैन है, चैन हासिल नहीं..
उसकी बेचैनी का अब सबब है कौन?
शोर अपनों का, गरीब की गली में ..
सन्नाटा है अमीर मोहल्ले में ...
इस सन्नाटे को चीर फिर इतना हँसता है कौन?




