माटी फूटा प्रेम अंकुर ।
दो हथेलियाँ में ।
तुम्हारे लिए ।
दो नैनो का आँगन ।
प्रेम का बिछौना ।
तुम्हारे लिए ।
बिन सजना काहे सजना ।
विरहन का इंतज़ार ।
तुम्हारे लिए ।
दो पल का मिलन ।
रणभूमि की पुकार ।
तुम्हारे लिए ।
सीप तुम, हम मोती ।
प्रीत का हार ।
तुम्हारे लिए ।
नन्हा दिया रखा द्वार ।
इस आँगन अन्धकार।
तुम्हारे लिए ।
सजन चुपके आना पार ।
आँगन ऊँची दीवार ।
तुम्हारे लिए ।
विष पिया, पत्थर पड़े।
अपनी जिद अड़े ।
तुम्हारे लिए ।
झलक को, साँसे थमी ।
विरही नैन निष्प्राण ।
तुम्हारे लिए ।
रामेश्वरी
दो हथेलियाँ में ।
तुम्हारे लिए ।
दो नैनो का आँगन ।
प्रेम का बिछौना ।
तुम्हारे लिए ।
बिन सजना काहे सजना ।
विरहन का इंतज़ार ।
तुम्हारे लिए ।
दो पल का मिलन ।
रणभूमि की पुकार ।
तुम्हारे लिए ।
सीप तुम, हम मोती ।
प्रीत का हार ।
तुम्हारे लिए ।
नन्हा दिया रखा द्वार ।
इस आँगन अन्धकार।
तुम्हारे लिए ।
सजन चुपके आना पार ।
आँगन ऊँची दीवार ।
तुम्हारे लिए ।
विष पिया, पत्थर पड़े।
अपनी जिद अड़े ।
तुम्हारे लिए ।
झलक को, साँसे थमी ।
विरही नैन निष्प्राण ।
तुम्हारे लिए ।
रामेश्वरी
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