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Friday, December 14, 2012

माटी फूटा प्रेम अंकुर ।
दो हथेलियाँ में ।
तुम्हारे लिए ।

दो नैनो का आँगन ।
प्रेम का बिछौना ।
तुम्हारे लिए ।

बिन सजना काहे सजना ।
विरहन का इंतज़ार ।
तुम्हारे लिए ।


दो पल का मिलन ।
रणभूमि की पुकार ।
तुम्हारे लिए ।

सीप तुम, हम मोती ।
प्रीत का हार ।
तुम्हारे लिए ।

नन्हा दिया रखा द्वार ।
इस आँगन अन्धकार।
तुम्हारे लिए ।

सजन चुपके आना पार ।
आँगन ऊँची दीवार ।
तुम्हारे लिए ।

विष पिया, पत्थर पड़े।
अपनी जिद अड़े ।
तुम्हारे लिए ।

झलक को, साँसे थमी ।
विरही नैन निष्प्राण ।
तुम्हारे लिए ।

रामेश्वरी

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