कडकडाती ठण्ड में..
दांतों का गुनगुनाना ..
नसीब अपने ..
पत्थर का सिरहाना ..
पत्थर का सिरहाना ..
फुटपाथ का बिस्तर ...
मिटटी की रजाई ...
देखो सेज़ ये कैसी
मिटटी की रजाई ...
देखो सेज़ ये कैसी
मैंने सजाई ...
खुला नीला आसमान ..
ओड़ते हैं हम ..
भोर भये ..
भोर भये ..
चुस्ती से दौड़ते हैं हम ....
बड़ी सी गरीबी का ..
ये छोटा सा है गम ...
इक माँ की कोख से ..
लिया था जन्म ..
दूजी की आगोश में ..
निकलेगा ये दम ...रामेश्वरी

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