उनका पता
कागज़ पर उनका पता लिखा था ।
लफ्ज़ उजागर थे नहीं, बस उनका चेहरा दिखा था ।
हैरां थी ..वो ये क्या लिख गए ।
पूछा "जनाब " ..
ये कौन नगरी, कैसा देश ..
जो दिखता नहीं।
बोले जनाब ।
दुनिया एक बाज़ार ।
बिकाऊ नहीं मेरा आचार ।
मेरे ह्रदय तक आने का रास्ता ।
इस दुनिया से आता नहीं ।
.. ।रामेश्वरी
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