आज भी
अकाल है, बाढ़ है
भूखे बच्चे हैं
भूख है
लाचार माँ है
सूखे खेत हैं
खलियान हैं
पर वो लंगड़ा बाप नहीं
मय हैं
मयखाने हैं
हर ओर शराबी बाप कहीं ।
अब ना हल है
ना वो कल है
ना वो मदर इंडिया
गली कूंचे वेश्यालय
हर कहीं ॥
अकाल है, बाढ़ है
भूखे बच्चे हैं
भूख है
लाचार माँ है
सूखे खेत हैं
खलियान हैं
पर वो लंगड़ा बाप नहीं
मय हैं
मयखाने हैं
हर ओर शराबी बाप कहीं ।
अब ना हल है
ना वो कल है
ना वो मदर इंडिया
गली कूंचे वेश्यालय
हर कहीं ॥