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Thursday, March 21, 2013







नेता जी ,,

थोड़ी सी जादूगिरी 
हमारे लहू में भी जगा दीजिये ..
ये कुर्सी आप रखें ..
हमें दिलों का सिंहासन दीजिये ...

कौन कहता है गूंगी है ..राजनीति  ..
ये तो अब खून खून में बोलती है।।
ये अमरबेल वो ..
जो इंसानी नसों में जड़े छोड़ती है ..
नगर, शहर, गली, ये घर घर डोलती है ..
जो डसा गया इससे,
 उसकी तूती बोलती है ..
 अब जुबां बन चुकी ..राजनीती  ..
सासू बहुरिया से ..
बहुरिया सासू से ..
राजनीति में बोलती है ...
ये चाशनी है वो ..
जो चापलूसों की जुबां में घुलती है 
इसीलिए बस दोस्तों ..
राजनीति की भाषा बोलो ..
मीठा खाओ ना खाओ।।
जुबान में राजनीति की चाशनी घोलो ....रामेश्वरी  

Sunday, March 17, 2013

सबहूँ गुणीजन संतो को मेरा प्रणाम ..
केसरिया चोला,  ओढ़ करूँ,  राम राम ..
स्वार्थ के लिए,  बेचते जो अपने भगवान् ..
ऐसे स्वार्थियों से,  मैं भला वानर निष्काम ..

भगवा मेरा चोला,  भगवा मेरे अंतरयामी ..
खोजने सिये माता, गदा थी मैंने थामी ..
कलजुग भया, संतन को भोज कोई पूछे नाहीं ..
धन दौलत की चाह रखे,  ढोंगी नामी गिरामी ..

इसीलिए देख इंसान,  मैं जागे नयन मूंदुं ...
इस स्वार्थी जगत में,  सच्चा मानुष कहाँ ढूँढूँ ...

नयन , कान, जिह्वा, बंद कर गए देखो कैसे बापू गांधी ..
शायद भांप गए थे वो,  लाएगा भविष्य, स्वार्थ की आंधी ॥॥॥। 
रामेश्वरी ....तस्वीर क्या बोले समूह में मेरे रखे गए कुछ शब्द । 




Friday, March 8, 2013

बसंत आया, बसंत आया ..




बसंत आया, बसंत आया ..
खिले बसंती पुष्प ..
हर मन बसंत सा निखर आया ..
बसंत आया, बसंत आया ..


प्रभाकर ने चोला बदला ..
स्वयं ओजस रूप आया ..
कोपलें नयी खिल उठीं ..
प्रकृति में श्रृंगार आया ..
बसंत आया बसंत आया ..

मुखर हुए पलाश शाख पर ..
टेसू भी रंग भर लाया ..
वात बसंती मचल रही ..
पंछियों ने राग सुनाया ...
बसंत आया, बसंत आया ...

राम रहीम में मनमुटाव कब से ..
जब से मुख पर...
मंदिर मस्जिद आया ..
बसंत,   होली पर्व लाया ..
बिछडे दिलों में सौहार्द लाया ..
बसंत आया, बसंत आया .....रामेश्वरी 





Tuesday, March 5, 2013

जलते नहीं हाथ कभी, उठाने से सर्वशिक्षा अभियान की मशाल ॥ 
अंगूठे ने घर हैं फूंके, रोशनाई से कलम की, जीवन हो खुशहाल ॥। रामेश्वरी

प्रथम प्रणाम ......




प्रथम प्रणाम ......


पंचतत्व निर्मित ..
बिखरी रूह को हमारे देते जो आयाम । 
उस ऊपरवाले को खुदा, भगवान, जीजस ..
जो भी दो तुम नाम। 
उन्ही की चरणों में ..
मेरा प्रथम प्रणाम । 

एक मेरी मुस्कान, लगती बेशकीमती जिन्हें ..
देने वो नन्ही मुस्कान हमें,  दर्द लगी खुशियाँ जिन्हें ।  
अपने विधाता को, मेरे जन्मदाता को । 
उनकी तस्वीर को, पाया उन्हें, अपनी तकदीर को । 
मेरा प्रथम प्रणाम 


इंसान से इंसानियत ..
चुटकी सी मुस्कान देने,  लबों को किसी की ..
आजीवन करते हैं जो काम ..
चल सके हम भी इस राह पर ..
उन्ही की राहों को ..
मेरा प्रथम प्रणाम । 

जीना है तो जिंदादिल जियें । 
देश पर शीश जिन्होंने सजदे किये ..
खड़े सीमा पर जो जवान । 
उन प्रहरियों को ..
जागरूक शहरियों को ..
मेरा प्रथम प्रणाम । रामेश्वरी 





इस छोर से उस छोर । 
आसमां को मिलाता है कौन ? 
काली घनेरी बदलियों को चीर । 
दूर क्षितिज तक । 
ये सतरंगी रंग बिखेरता है कौन ?

नयन विराम से हो जाते । 
जब जब इन्द्रधनुष आकाश पर पाते । 
सुना था, इंद्र धरा पर सौन्दर्य बाण चलाते। 
देख ये सतरंगी डोर ।  सोचूं ..
मनचली प्रकृति पर लगाम लगाता है कौन ?


सतरंगी रंगों से कुछ रंग उधार लिए । 
यूँ बेरंग जीवन को रंग हमने दिए ..
जीने की अभिलाषा का पथ ..
संग हाथ अपने  हाथों में लिए ..
हमें विकास की राह ..
दिखाता है कौन ?

इन्द्रधनुष से हमें रंग छोड़ना है ..
हर धर्म के लोगों को प्रेम से जोड़ना है ..
सभी धर्म सात रंग बन जाएँ । 
धरा के एक सिरे से दुसरे सिरे तक ..
नफरत भरे दिलों को,  भाईचारे की और मोड़ना है ...
(रामेश्वरी)

"तस्वीर क्या बोले" समूह मे मेरे कुछ शब्द ......




बचपन के वो मित्र ..


अपने मन के भावों को आपके समक्ष रखने की एक कोशिश मात्र ....तस्वीर क्या बोले समूह में रखे गए मेरे कुछ शब्द ..


हर लम्हा ...
हर पल ..
याद आते। 
मन के किसी कोने में बैठे ..
सुबकते बचपन को ..
 सहला जाते ..
यादों में
बचपन के वो मित्र । 

रचे बसे थे ह्रदय ..
बन सुगन्धित ईत्र ..
महकाते अपनी२ बगिया ..
जाने कहाँ खो से गए ..
दुनियादारी के कुम्भ में ..
ह्रदय रचा बसा वही पुराने चित्र ..
लुभावने भोले मासूम ..
थोड़े से नटखट ..
मेरे बचपन के वो मित्र ..


कुछ खो चुके। 
कुछ अचानक मिल जाते ..
ऋतुओं पर निर्भर कहाँ मित्रता ..
बरसों के मिलन पर ..
हर दिल ..
जैसे त्यौहार मनाते । 

 वो छोटी सी केतली ..
वो छोटा सा दर्पण ..
वो घर घर का खेलना ..
वो सबका अपनापन ..
वो छुपना, वो छुपाना । 
वो रूठना, वो मनाना |  
आज से भला था ..
वो बीता ज़माना ..
(रामेश्वरी)