थोड़ी सी जादूगिरी
हमारे लहू में भी जगा दीजिये ..
ये कुर्सी आप रखें ..
हमें दिलों का सिंहासन दीजिये ...
कौन कहता है गूंगी है ..राजनीति ..
ये तो अब खून खून में बोलती है।।
ये अमरबेल वो ..
जो इंसानी नसों में जड़े छोड़ती है ..
नगर, शहर, गली, ये घर घर डोलती है ..
जो डसा गया इससे,
उसकी तूती बोलती है ..
अब जुबां बन चुकी ..राजनीती ..
सासू बहुरिया से ..
बहुरिया सासू से ..
राजनीति में बोलती है ...
ये चाशनी है वो ..
जो चापलूसों की जुबां में घुलती है
इसीलिए बस दोस्तों ..
राजनीति की भाषा बोलो ..
मीठा खाओ ना खाओ।।
जुबान में राजनीति की चाशनी घोलो ....रामेश्वरी

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