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Sunday, March 17, 2013

सबहूँ गुणीजन संतो को मेरा प्रणाम ..
केसरिया चोला,  ओढ़ करूँ,  राम राम ..
स्वार्थ के लिए,  बेचते जो अपने भगवान् ..
ऐसे स्वार्थियों से,  मैं भला वानर निष्काम ..

भगवा मेरा चोला,  भगवा मेरे अंतरयामी ..
खोजने सिये माता, गदा थी मैंने थामी ..
कलजुग भया, संतन को भोज कोई पूछे नाहीं ..
धन दौलत की चाह रखे,  ढोंगी नामी गिरामी ..

इसीलिए देख इंसान,  मैं जागे नयन मूंदुं ...
इस स्वार्थी जगत में,  सच्चा मानुष कहाँ ढूँढूँ ...

नयन , कान, जिह्वा, बंद कर गए देखो कैसे बापू गांधी ..
शायद भांप गए थे वो,  लाएगा भविष्य, स्वार्थ की आंधी ॥॥॥। 
रामेश्वरी ....तस्वीर क्या बोले समूह में मेरे रखे गए कुछ शब्द । 




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