प्रथम प्रणाम ......
पंचतत्व निर्मित ..
बिखरी रूह को हमारे देते जो आयाम ।
उस ऊपरवाले को खुदा, भगवान, जीजस ..
जो भी दो तुम नाम।
उन्ही की चरणों में ..
मेरा प्रथम प्रणाम ।
एक मेरी मुस्कान, लगती बेशकीमती जिन्हें ..
देने वो नन्ही मुस्कान हमें, दर्द लगी खुशियाँ जिन्हें ।
अपने विधाता को, मेरे जन्मदाता को ।
उनकी तस्वीर को, पाया उन्हें, अपनी तकदीर को ।
मेरा प्रथम प्रणाम
इंसान से इंसानियत ..
चुटकी सी मुस्कान देने, लबों को किसी की ..
आजीवन करते हैं जो काम ..
चल सके हम भी इस राह पर ..
उन्ही की राहों को ..
मेरा प्रथम प्रणाम ।
जीना है तो जिंदादिल जियें ।
देश पर शीश जिन्होंने सजदे किये ..
खड़े सीमा पर जो जवान ।
उन प्रहरियों को ..
जागरूक शहरियों को ..
मेरा प्रथम प्रणाम । रामेश्वरी

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