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Tuesday, March 5, 2013

बचपन के वो मित्र ..


अपने मन के भावों को आपके समक्ष रखने की एक कोशिश मात्र ....तस्वीर क्या बोले समूह में रखे गए मेरे कुछ शब्द ..


हर लम्हा ...
हर पल ..
याद आते। 
मन के किसी कोने में बैठे ..
सुबकते बचपन को ..
 सहला जाते ..
यादों में
बचपन के वो मित्र । 

रचे बसे थे ह्रदय ..
बन सुगन्धित ईत्र ..
महकाते अपनी२ बगिया ..
जाने कहाँ खो से गए ..
दुनियादारी के कुम्भ में ..
ह्रदय रचा बसा वही पुराने चित्र ..
लुभावने भोले मासूम ..
थोड़े से नटखट ..
मेरे बचपन के वो मित्र ..


कुछ खो चुके। 
कुछ अचानक मिल जाते ..
ऋतुओं पर निर्भर कहाँ मित्रता ..
बरसों के मिलन पर ..
हर दिल ..
जैसे त्यौहार मनाते । 

 वो छोटी सी केतली ..
वो छोटा सा दर्पण ..
वो घर घर का खेलना ..
वो सबका अपनापन ..
वो छुपना, वो छुपाना । 
वो रूठना, वो मनाना |  
आज से भला था ..
वो बीता ज़माना ..
(रामेश्वरी)


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