मैं एक नन्हा फूल हूँ ..
मैं नहीं तुम्हारी भूल हूँ ...
फिर क्यूँ दी मुझे धूल?
चुभ रही "रामेश्वरी " ह्रदय मैं शूल
तुम्हारा ही अंग हूँ ..अंग प्रत्यंग हूँ ..
इस अंग को क्यूँ खंड खंड किया ..?
मैं थी ईश्वर का वरदान ..
अभिशाप पर क्यूँ घमंड किया ?
दर - दर भटको जब जीरण अवस्था में..
सोचो शायद हमने था ये क्या किया ?
मैं नहीं तुम्हारी भूल हूँ ...
फिर क्यूँ दी मुझे धूल?
चुभ रही "रामेश्वरी " ह्रदय मैं शूल
तुम्हारा ही अंग हूँ ..अंग प्रत्यंग हूँ ..
इस अंग को क्यूँ खंड खंड किया ..?
मैं थी ईश्वर का वरदान ..
अभिशाप पर क्यूँ घमंड किया ?
दर - दर भटको जब जीरण अवस्था में..
सोचो शायद हमने था ये क्या किया ?

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