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Friday, June 24, 2011


मजदूर  घर  बनाये  खुद   उसका  घर नहीं 
नेताओं   को  अब  किसी  बात  का  डर  नहीं 
चोर  चोर  मौसेरे  भाई  हो  गए 
हिस्सा  बांटे शर्म  नहीं .

जिन्हें  बैठना  था  समाधि  पर 
वही  अनशन  करें 
देश  के  लिए 
जिसका  कोई  तर्क नहीं ...
युवा  वर्ग   को  फर्क  नहीं ..
अथिथि   देवो    भव  में   यहाँ 
आतंकवादी  पूजे  जाते  हैं ..
घर  घर  में  अब  इक  आद
ईमानदार  खोजे  जाते  हैं 
खेती  कर  दूसरों    का  भरे  पेट 
किसान  खुद  भूख  से  खुदखुशी  करता   है 
बच्चों का देख भूख से चेहरा 
रोज ज़िन्दगी से जंग लड़ता है 
किसी  के   दिल  में   दर्द  नहीं ...
साधू  वैश्यालय  चला  रहें 
सारे झूटे  भरम   हैं  यहीं 
देश  को   माता  का  दर्जा   दिया 
माँ  बहन  की  लाज  लूट  रही   यहीं ...
अब  कृष्ण  लाज  बचने  को  कहीं  नहीं ...
कुछ  करो  वरना  मै मै   ही   रहेगा 
हम  नहीं ,   हम  नहीं ,  हम  नहीं ..

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