मजदूर घर बनाये खुद उसका घर नहीं
नेताओं को अब किसी बात का डर नहीं
चोर चोर मौसेरे भाई हो गए
हिस्सा बांटे शर्म नहीं .
जिन्हें बैठना था समाधि पर
वही अनशन करें
देश के लिए
जिसका कोई तर्क नहीं ...
युवा वर्ग को फर्क नहीं ..
अथिथि देवो भव में यहाँ
आतंकवादी पूजे जाते हैं ..
घर घर में अब इक आदईमानदार खोजे जाते हैं
खेती कर दूसरों का भरे पेट
किसान खुद भूख से खुदखुशी करता है
बच्चों का देख भूख से चेहरा
रोज ज़िन्दगी से जंग लड़ता है
किसी के दिल में दर्द नहीं ...
साधू वैश्यालय चला रहें
सारे झूटे भरम हैं यहीं
देश को माता का दर्जा दिया
माँ बहन की लाज लूट रही यहीं ...
अब कृष्ण लाज बचने को कहीं नहीं ...
कुछ करो वरना मै मै ही रहेगा
हम नहीं , हम नहीं , हम नहीं ..
No comments:
Post a Comment