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Saturday, February 11, 2012

सोच नशे में गम तेरा भुला दूँगी, नशेमंद मैं यूँ हो ली ...
ये क्या!  नशा और भी तेरी याद के करीब ले आया ...
सोचा नींद में तेरा गम भुला दूँगी, सोच निंद्रा ओड़ ली ...
ये क्या ! खवाबों में भी तेरा ही अक्श नज़र आने लगा ...
सोच कड़वी यादों को कड़वा जहर मिटा देंगी, सो पी लिया ...
ना गम गया, ना तू आया, जनाज़ा अब मेरा उठने वाला है ..
आ गम दूर तू ही कर, आने से तेरे गर सांस मेरी लौट आये...............रामेश्वरी 

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