Search My Blog

Wednesday, February 29, 2012

चल



बैठ गुलमोहर तले, सर रख सिरहाने तेरे, चल प्रेम बतियां बतियाएं हम..
मिलन का हमारे दुश्मन ये जहां है, चल क्षितिज तक टहल कर आये हम...
प्रेम क्षुधा बंजर सूखी पड़ी, कर प्रेम वर्षा, प्रेम उपवन हरा भरा कर आये हम.....
प्रेम के रंग अनगिनत, चलो उस छोर से इस छोर इक इन्द्रधनुष रचाएं हम.....

(रामेश्वरी )

No comments:

Post a Comment