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Saturday, February 25, 2012

शेर तो स्वभाव से, जन्म जात शेर है....
पर शेर दिल बनकर दिखाओ तो जाने...
दहाड़ से अपनी, खेमा दुश्मन का हिलाओ ..
तो शेरदिल तुमको जाने ....
धरती पर रहकर चंद बूँदें गिरा रोये सब...
दुश्मन को चने चबवा, रूला दो तब जाने ....
एक कदम से तुम्हारी धरती हिले..
संग गर्जना से नील आसमान में........
दामिनी जगाओ तो जाने ..........
आवाज़ में तुम्हारी अग्नि का शोर हो..
जाओ तुम जहाँ, वहीँ रात्रि में भोर हो...
आगमन पर तुम्हारी भोर में भी अन्धकार ..
हो तो, शेरदिल तुमको जाने .......रामेश्वरी

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