कौन कहता है मैं डरती नहीं..
डरती हूँ मैं, पेट की आग से..
अनाथ बच्चों की भूखे राग से..
डरती नहीं, प्रेम है, बम बम भोले से..
डरती मगर, बम और सिर्फ बम गोले से..
निकल आये न जाने, यम बन, किस झोले से ..
डरती नहीं किसी की मार से, फटकार से..
डरती हूँ, भूखे मरते किसान, सेठ की डकार से ..
बहुत डरती हूँ, गरीबी से, तंगहाली से..
डरती हूँ, सिहर उठती हूँ, दंगों से हुई बदहाली से ..
डरती हूँ खत्म हो रही इंसानियत से..
इंसान पर हावी हो रही हैवानियत से.....................
डरती हूँ मैं, डरती हूँ..................रामेश्वरी

वाह बहुत सुंदर.... मैं भी डरती हूँ
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