बैठा तेरे मयखाने पिला दे साकी इतना, सही गलत का भेद भुला दे....
जो घरवाली लगे रोज डायन मोहे , वो पे केटरीना का लेप लगा दे..........
रोज२ करे वो किटकिट मोऊ पे, बाणी ओऊ के गीता का सार चड़ा दे...
हँसे तो मैं दुबक जाऊं पाछे किवड़िया, थोड़ी उसे मोहिनी मुस्कान दिला दे .....
चले तो धरती हाले कांपे ब्रह्माण्ड, इन्द्र शर्मा जाए वो को अप्सरा का रूप बना दे .....
जो घरवाली लगे रोज डायन मोहे , वो पे केटरीना का लेप लगा दे..........
रोज२ करे वो किटकिट मोऊ पे, बाणी ओऊ के गीता का सार चड़ा दे...
हँसे तो मैं दुबक जाऊं पाछे किवड़िया, थोड़ी उसे मोहिनी मुस्कान दिला दे .....
चले तो धरती हाले कांपे ब्रह्माण्ड, इन्द्र शर्मा जाए वो को अप्सरा का रूप बना दे .....
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