फिर इक नयी सृष्टि,नयी पीड़ी गर्भ में मेरे..
धड़क रही है..
व्याकुल तन, मन, खवाबों में भी अब जैसे..
तस्वीर तेरी बुन रही है ...
ममता भरा नारी जीवन संपूरण होगा मेरा
आने से तेरे...
जल्द गूंजेंगी किलकारियां उसकी इस सूने से..
आँगन मेरे..
सात फेरे लिए उनसे, अब पूरण धरती माँ का ..
जैसे फेरा होगा...
जब देखूँगी मासूम चेहरा तेरा लाल मेरे..
मेरा तभी सवेरा होगा......रामेश्वरी
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