जहाँ भाई भाई को मारे गोली..
जहाँ चंद सिक्कों ने अस्मत तोली..
जहाँ लगती बेटों की बोली....
जहाँ अजन्मी बच्ची जिंदगी मांगे..
हाथ उठाये माँ की झोली....
जहाँ सड़क सोने को, पास नहीं खोली ...
कहा गया जिसे सोने की चिड़िया ...
मैं ग़ुलाम ही भली थी, रोती हुई..
वो सोने चिड़िया बोली.....................
ऐसे होश्मंदों से मैं नशेमंद अच्छा हूँ ..
इनसे समझौता कर सकता नहीं,
मैं मयखाने में अच्छा हूँ...................रामेश्वरी
जहाँ चंद सिक्कों ने अस्मत तोली..
जहाँ लगती बेटों की बोली....
जहाँ अजन्मी बच्ची जिंदगी मांगे..
हाथ उठाये माँ की झोली....
जहाँ सड़क सोने को, पास नहीं खोली ...
कहा गया जिसे सोने की चिड़िया ...
मैं ग़ुलाम ही भली थी, रोती हुई..
वो सोने चिड़िया बोली.....................
ऐसे होश्मंदों से मैं नशेमंद अच्छा हूँ ..
इनसे समझौता कर सकता नहीं,
मैं मयखाने में अच्छा हूँ...................रामेश्वरी
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