हे देव मेरे, ये क्या करा...
जहाँ भरना था प्यार मोहब्बत ...
वहां स्वार्थ ही स्वार्थ क्यूँ भरा...
कहा किसी ने सत्य है ..
भय बिना ना होत प्रीत ...
डर ही सूर्य के पूजन की नींव
डर ही करे ईश्वर रूप सजीव ..
डर ही रोशनी का आधार ...
पाप पुण्य का डर भया,
जीवन की नैया संसार पार...
डर से ही रचा इंसान ने ...
ईश्वर के कई प्रतीक ...
डर से हो रहे कई वैज्ञानिक ..
प्रयोग सटीक ...
जग में लिया जन्म जब मानव का ..
अब ब्रह्मा देव का डर क्यूँ ?
डर नहीं, पूजन नहीं...
मौत हर पल डराए, तुच्छ इंसान ...
सबसे ज्यादा पूजे जाते, मेरे शिव ..
सत्यम शिवम् सुन्दरम भगवान ....
डर में छिपा हित भी...
माँ करने अनुशासित बालक..
नित नए रूप से डराए ...
कभी बुडिया आये डराने ..]
कभी दाढ़ी वाला बाबा आ जाये...
बिन भय इंसान खुद इंसान ना रह जाएगा ..
बचाने वजूद उसे अपना, हर रोज डराया जायेगा ................रामेश्वरी
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