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Friday, February 17, 2012


इक एकं इक 
देंगे भ्रस्त घुटने  टेक..
इक इक दुई भये ..
दुखड़ा ये भारत माँ ..
अब कहून से कहे...
दो लफ्ज, चार हुए..
चार हुए आठ...
सगरी मेहनत करें जमूरे ..
 आलसी मदारी करे है ठाट......
आठ आठ  सोलह हुए ..
सोलह हुए बतीसी .....
देखे बैठ मंदिर में.नग्न तस्वीरें  ..,
हाय, स्तिथि,  देश की कैसी...
अंधेर नगरी चौपट राजा जैसी  ....
बतीसी बतीसी चौसठ हुए..
हम हाथ में हाथ बैठे हुए ....
इक दूजे से सहमे सटे हुए..
महंगाई घट घट हुई ....
चौसठ चौसठ सौ मा अठाईस ..
अभी भी जागो, सोचो, करो...
अभी भी कर सकते हो अपनी..
बुद्धि, युवा सोच, एकता की आजमाईश ....
देना मत सही उम्मीदवार को..
कोई दे चाहे रिश्वत, करे लाख कितनी फरमाईश ....
(रामेश्वरी)


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