वाह रे जमुरियत ...
सच में तू जमुरियत ही है..
और हम जमूरे बने कूदे, पलटियां मारे ..
तेरे इक इशारे पर...
"चल जमूरे नाचेगा...
नाचेंगे !
सच बोलेगा?
नहीं नहीं मालिक..
आपका नमक खाया है...
चल तो चुनाव है...
नाच के दिखा...
सभी मतदाताओं के मती(बुद्धि ) पर..
जमुरियत बना के दिखा..
दिखायेंगे ...जनाब.......
कुछ लटके कुछ झटके दिखा..
अंगूठा मेरे चिन्ह पर अटके ..
हलक पर उसके अटक कर दिखा..
सारे मत झटक के दिखा....
दिखायेंगे...जनाब..(रामेश्वरी)
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