बनूँ माँ, स्वप्न ...
नयी पीड़ी निर्मित ..
गर्भ मैं श्रृष्टि ..
फला है वृक्ष..
अक्ष वो मेरा होगा ..
है अभिमन्यु ....
मातृत्व जागे ..
बहे दूध नदिया ..
ऋणी हूँ देव ...
धड़कन सुनूं ..
धुंधला है अभी ..
सांस से सांस ...
फर्ज है जागा ..
बनी दीवारें घर ..
घड़ियाँ साल .......रामेश्वरी
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