सस्ती अब तो जान हुई, महंगा अब ज्ञान हुआ...
सब्जी दाल चावल महंगे,सस्ता बस अब किसान हुआ ...
ज़िन्दगी कट गयी, जोड़ते पाई२..
पसीना सस्ता, महंगा सर पे, मकान हुआ ...
अनाज सस्ता, सड़ रही मेहनत किसान की..
अब तो ईंट गारा, गोदाम का महंगा हुआ ...
रोज बिक रहे, विदेशी हाटों पर, जीवन सस्ता उनका ...
बच्चा सस्ता गरीब का, महंगा कुत्ता सेठ का हुआ....
खून अब तो सस्ता है..महंगा पेट्रोल अब तो हुआ....
बताओ कोई ओर ग्रह सस्ता, सर अपना हम जहां छुपायेंगे ..
अब तो धरती महंगी चाँद महँगा, अब गले फांस ही लगायेंगे .....
हर शय के दाम में आग लगी है, कैसे इसे बुझाएंगे..................(रामेश्वरी)
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