मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Wednesday, February 8, 2012
वहां पति की साँसे टूटी, यहाँ अबला गरीब की किस्मत फूटी, लूटी उसकी अस्मत रोटी को कई बार...
रोटी अब तो शर्म कर, भर उसके भूखे बच्चों का पेट, नोच रहे उसे वहशी रोज, नाचे वो बीयर बार ........रामेश्वरी
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