
सुनो प्रिये, मेरे संगीत की बस तू ही झंकार है
तुम हो तो, पतझड़ में भी मेरे लिए बहार है..
चाह किसे हो सज्जा की, तू ही मेरा पूरण श्रृंगार है ...
पूर्वा में सुगंध तेरी, लज्जाते चाँद में तेरा ही आकार है ..
रति से खूबसूरत तुम, यही मेरी कामदेव से टकरार है ...........
नैन कुछ देखते नहीं, ज्यूँ तेरे मनमोहक रूप का इंतज़ार है ...
रामेश्वरी
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