Search My Blog

Saturday, February 25, 2012

बिन जुर्म, कैसी सजा ..
बाबूल का घर तजा..
मंदिर सा कैदखाना ..
सात जन्म की सजा भई..
ना हाथ हथकड़ी ..
ना पैर ज़ंजीर भई ...
ख़ुशी२ काटें सजा सभी ..
फिर भी जेलर(साजन) से पहले ..
मौत मांगे कैदी (सजनी), 
सजा(प्रीत) कैसी भई .................रामेश्वरी 

No comments:

Post a Comment