कहा कबीर ने सत्य है...
की, "पाथर पूजे हरी मिले, मैं पूजूं पहाड़"...
भक्ति मैं सबहूँ आगे जाऊं, जोगी दूं पछाड़ ...
कण कण का ज्ञान कराऊँ, प्रेम का ना हो ज्ञान...
मृत शरीर मैं प्राण फूँक दूं, लूं मासूम ढोरों की जान ..
प्रभु देखो कहाँ कमी है मेरी भक्ति में...
कमी करते क्यूँ प्रभु? देने मुझे शक्ति में...
हर धाम के फेरे डारे, डारे लाख मनका फेर ...
पत्नी उल्हाना मारे, जननी बाहर करने न करी देर ...
रहना पत्नी के सहारे, कहे जननी संग बंधन का हेरफेर ...
प्रभु अब सुन लो मेरी, भाग्य का करो कुछ मेरे फेर...............रामेश्वर ी
की, "पाथर पूजे हरी मिले, मैं पूजूं पहाड़"...
भक्ति मैं सबहूँ आगे जाऊं, जोगी दूं पछाड़ ...
कण कण का ज्ञान कराऊँ, प्रेम का ना हो ज्ञान...
मृत शरीर मैं प्राण फूँक दूं, लूं मासूम ढोरों की जान ..
प्रभु देखो कहाँ कमी है मेरी भक्ति में...
कमी करते क्यूँ प्रभु? देने मुझे शक्ति में...
हर धाम के फेरे डारे, डारे लाख मनका फेर ...
पत्नी उल्हाना मारे, जननी बाहर करने न करी देर ...
रहना पत्नी के सहारे, कहे जननी संग बंधन का हेरफेर ...
प्रभु अब सुन लो मेरी, भाग्य का करो कुछ मेरे फेर...............रामेश्वर
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