हे मेरे देव, लिंगराज, त्रिपुरारी,
कदमों में तुम्हारे सृष्टि ये सारी ...
हैं हलाहल भोगी, नील जिसके अधर..
हैं वो भगवन, त्रिनेत्रधारी, गंगाधर..
चन्द्र जिसकी जटाओं में ..
गंगा बहे जिसकी लटाओं से...
बहे दूध सी गंगा की धारा,"द्युतिधारा" ...
थरथर कांपे धरती, जब तांडव हो तुम्हारा ..
सत्यम शिवम् सुन्दरम तुम, हे "महेश",
देव् तुल्यं, मिटाओ धरती में फैला ये द्वेष ...
हे नागभूषणं, हैं सदा हम आपके चरणं ...
इक जीवन, भक्ति में आपकी, हमें लगे कम......(रामेश्वरी )
कदमों में तुम्हारे सृष्टि ये सारी ...
हैं हलाहल भोगी, नील जिसके अधर..
हैं वो भगवन, त्रिनेत्रधारी, गंगाधर..
चन्द्र जिसकी जटाओं में ..
गंगा बहे जिसकी लटाओं से...
बहे दूध सी गंगा की धारा,"द्युतिधारा" ...
थरथर कांपे धरती, जब तांडव हो तुम्हारा ..
सत्यम शिवम् सुन्दरम तुम, हे "महेश",
देव् तुल्यं, मिटाओ धरती में फैला ये द्वेष ...
हे नागभूषणं, हैं सदा हम आपके चरणं ...
इक जीवन, भक्ति में आपकी, हमें लगे कम......(रामेश्वरी )
jai bhole ki.
ReplyDeletedhanaywad sohan ji
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