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Saturday, February 11, 2012

चल समंदर पार चलें ...
रख हाथ किस्मत की पतवार ...
हर बार चेनाब, धोखा ना देगी..चल .
हीर मेरे, उस दुनिया के भी पार...
मिलन मंजूर हो खुदा को शायद इस बार ...
शायद पत्थर ना मारे बेरहम दुनिया इस बार ...
चल मजनू, चल ,,,,,उस दुनिया के पार ....
शायद हो मंजूर रंक भी, अब राजा का हो इकरार ..
चल फरहाद , चल, फारस की उस खाड़ी के पार ...
खोद पहाड़, नहर ना निकालनी पड़े ..चल..
पा मेरी मौत की झूठी खबर, जान ना गवांनी पड़े.
चल बस अब चल उस दुनिया के पार................................रामेश्वरी

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