शिव हूँ मैं ब्रह्माण्ड का, मेरा श्रृंगार हो तुम ...
मेरे नैनो मैं समाया जो, वो संसार हो तुम...
मैं गर नटराज तो मेरी कला साधना हो तुम ..
इस आशुतोष की भी इक आशा हो तुम....
रूद्र मैं मेरा रूद्राक्ष हो तुम, प्रणय स्वीकार करो तुम ...
अंगीकार कर, मुझे पूरण अर्धनारीश्वर बनाओ तुम ...रामेश्वरी
मेरे नैनो मैं समाया जो, वो संसार हो तुम...
मैं गर नटराज तो मेरी कला साधना हो तुम ..
इस आशुतोष की भी इक आशा हो तुम....
रूद्र मैं मेरा रूद्राक्ष हो तुम, प्रणय स्वीकार करो तुम ...
अंगीकार कर, मुझे पूरण अर्धनारीश्वर बनाओ तुम ...रामेश्वरी
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