मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
Search My Blog
Saturday, February 4, 2012
मोरे पिया गए जब से, दिन लगे मोहे बरस..
ह्रदय विरह विकल,दिन रैन नैनन दर्शन तरस ..
जब जब जाओ तुम, रोशन अटरिया बने मेरा ज्यूँ बंजर..
शीतल हवा, रात चांदनी, चिड़ाने मुझे चलाये हृदय खंजर ...रामेश्वरी
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment