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Monday, February 6, 2012

नहीं थी भूल...
भूख की तीव्र शूल ..
ओड़ ली धुल ||

तपन गर्मी |
फर्ज पे हठधर्मी ...
जले है तन.||

रोज कमाई |
तो बालकन खाई |
क्षुधा मिटाई ||

तन घिसे है |
पत्थर तू तोड़े है |
तू माँ महान ||

संघर्ष यही |
औलाद का भविष्य
नींव रखे है ||

पाल संतान |
खुद का यही अंत |
वृद्धआलय ||...........रामेश्वरी (HAAYKU VIDHI)

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