Search My Blog

Thursday, February 2, 2012

 तन्हा रहना चाहा तनहाइयों से..
यादों बसर करो इस ज़हन में मेरे...

तन्हाई हसी तुम क्यूँ, मेरी तन्हाई पर ..?
कहे तन्हाई, देख बीती यादें हैं साए मेरे ................रामेश्वरी

No comments:

Post a Comment