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Thursday, February 2, 2012


ना दे...

गर देते हो गरीबी..
प्रभु  हमें ईमान ना दे..

गर भर नहीं सकते पेट गरीब का..
अन्दर उसके ढीठ जान ना दे ..

पेट बना धनुष समान सर्द रातों में ..
गर ढक नहीं सकते कांपती रूह ..
बैठ ऊपर खुद, मौसम बदली का ..
फरमान ना दे...

गर चाहते हो सिंहासन अपना ..
शांत हृदय नारी को जुबान ना दे,,,

गर देशभक्त बेटे चाहते हो..
इतने नेता महान ना दे....

छोटी सी खुशियाँ हैं मेरी ..
मुझे सारा जहाँ ना दे..
(रामेश्वरी)




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