पत्ते चनार ...
मौसम ए बहार है ..
ये है कश्मीर ..
हिम का है आलय..
झीलों से लबा....
झेलम का जल...
मन बोली निर्मल ..
स्वर्ग है जहाँ ...
झील है डल ..
शान है तो शिकारे ..
हमें पुकारे .....
शालीमार है ..
बाग़ निशात जहाँ ..
ये है कश्मीर ....
जन्नत जहाँ ..
स्वर्ग से जो सुन्दर ...
हे " कालिदास"
कहवा चाय ...
ठण्ड से जो लड़ी है ..
बर्फ पड़ी है ...
कैलाश बसे...
अमरनाथ जहाँ ..
बम भोले है ....
(ek haayku ....rameshwari )
मौसम ए बहार है ..
ये है कश्मीर ..
हिम का है आलय..
झीलों से लबा....
झेलम का जल...
मन बोली निर्मल ..
स्वर्ग है जहाँ ...
झील है डल ..
शान है तो शिकारे ..
हमें पुकारे .....
शालीमार है ..
बाग़ निशात जहाँ ..
ये है कश्मीर ....
जन्नत जहाँ ..
स्वर्ग से जो सुन्दर ...
हे " कालिदास"
कहवा चाय ...
ठण्ड से जो लड़ी है ..
बर्फ पड़ी है ...
कैलाश बसे...
अमरनाथ जहाँ ..
बम भोले है ....
(ek haayku ....rameshwari )
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