बुने थे फंदे .
इन रिश्तों के ..
बडे हुनर से मैंने...
अब लगता है कभी २.
धागा ही शायद कच्चा था .....
चार दिन ओढ़ न सके..
शिथिल पड़ी दुनिया में...
शीतलता पड़ी रक्त में अब..
सिलायियों का मगर रिश्ता सच्चा था... .रामेश्वरी
इन रिश्तों के ..
बडे हुनर से मैंने...
अब लगता है कभी २.
धागा ही शायद कच्चा था .....
चार दिन ओढ़ न सके..
शिथिल पड़ी दुनिया में...
शीतलता पड़ी रक्त में अब..
सिलायियों का मगर रिश्ता सच्चा था... .रामेश्वरी
बहुत सुंदर भाव ....!!
ReplyDeleteharkeerat heer ji shat shri akal...mera ahobhagya jo aapko mere kuch shabd achche lage....
ReplyDeleteकच्चे रिश्ते के पक्के रिश्ते ....बहुत सुंदर सखी ....
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