मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Friday, July 6, 2012
कम पानी में परछाई बनती है हमारी..
कभी देखा है सागर में अपनी परछाई को..शायद नहीं.......होती.
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