चुभन बहुत है ..
इन फूलों के स्पर्श में...
डरती हूँ इन फूलों से ...
खिले हैं जो...
सींचे थे जो..
स्वार्थ के गर्त में...
स्वर्ण गुलदानो में ...
स्वर्ण आभा ले बैठे..
खिल स्वर्ण गुलदानो में..
खुशबू मगर स्वर्ण ..
कभी दे सकता नहीं....
कोमलता है कोसो दूर ..
..रामेश्वरी ..
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