ना रूठो तुम..
हमें मनाना नहीं आता...
ना मारो फूल भी तुम...
हमें चोट खाना नहीं आता....
विश्वास अति करो ना हम पर तुम ..
विश्वास हमारे शब्दकोष में नहीं आता...
कहते हो हमसे नैनो की भाषा पढ़ें हम..
हमें जब कलम उठाना ही नहीं आता ...
कहते हो मूरत बना तुम्हारी पूजे हम..
कैसे गढ़ें हम मूरत तेरी...
हमें कुम्हार की चाप घुमाना नहीं आता...
ना पढ़ाओ हमें तुम, प्रेम का पाठ...
सबक याद रखना हमें नहीं आता....रामेश्वरी
हमें मनाना नहीं आता...
ना मारो फूल भी तुम...
हमें चोट खाना नहीं आता....
विश्वास अति करो ना हम पर तुम ..
विश्वास हमारे शब्दकोष में नहीं आता...
कहते हो हमसे नैनो की भाषा पढ़ें हम..
हमें जब कलम उठाना ही नहीं आता ...
कहते हो मूरत बना तुम्हारी पूजे हम..
कैसे गढ़ें हम मूरत तेरी...
हमें कुम्हार की चाप घुमाना नहीं आता...
ना पढ़ाओ हमें तुम, प्रेम का पाठ...
सबक याद रखना हमें नहीं आता....रामेश्वरी
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