सोयी कलम की निन्द्रा को...
खून के छिंटों से जगाया है मैंने.....
चौंक कर जागी कलम मेरी...
लिखूंगी जो तू कहेगी हाथों से अपने ...
अभी रोशनाई भी भरवानी है मैंने.........रामेश्वरी
खून के छिंटों से जगाया है मैंने.....
चौंक कर जागी कलम मेरी...
लिखूंगी जो तू कहेगी हाथों से अपने ...
अभी रोशनाई भी भरवानी है मैंने.........रामेश्वरी
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