याद आ गया वो शरारती बचपन..
जब रंग बिरंगी आईस क्रीम के छींटे ..
कपड़ों पर गिरा करते थे...
क्या२ खाया हमने माँ से छुप छुपकर ..
उसके निशाँ गालों पर मिला करते थे.......
जो दिख गया दुसरे बालक के हाथ..
पाने की जिद उसकी, हम भी माँ से किया करते
रामेश्वरी
जब रंग बिरंगी आईस क्रीम के छींटे ..
कपड़ों पर गिरा करते थे...
क्या२ खाया हमने माँ से छुप छुपकर ..
उसके निशाँ गालों पर मिला करते थे.......
जो दिख गया दुसरे बालक के हाथ..
पाने की जिद उसकी, हम भी माँ से किया करते
रामेश्वरी
भुलाये से नहीं भूलते वो प्यारे दिन....
ReplyDeleteसुन्दर भाव
अनु