चलते २ बादलों संग, भीगते2
इक लम्बी सी डगर पर .
बारिश की बूंदों से यूँ ही इक ..
चलती सी मुलाक़ात हुई थी...
ढेरों न सही पर कुछ बातें हुई थी...
ए बूंदों धन्य हो तुम, दोस्ती तुम्हारी ..
आँचल में छिपा लेते हो तुम व्यथा हमारी ..
दुनिया कहे लाख, कैसे रोते हैं हम...
इन आंसुओं को हमारे, कैसे खुद में ...
ढांप लेते हो तुम,,,
इसी बहाने, तले आसमां, जी भर रो लेते हैं हम ...
और दुनिया समझे, ये बूँदें हैं बारिश की..
गर्द ज़मी है सीने में जो, उसे तुझ से ही धो लेते हैं हम.........रामेश्वरी
इक लम्बी सी डगर पर .
बारिश की बूंदों से यूँ ही इक ..
चलती सी मुलाक़ात हुई थी...
ढेरों न सही पर कुछ बातें हुई थी...
ए बूंदों धन्य हो तुम, दोस्ती तुम्हारी ..
आँचल में छिपा लेते हो तुम व्यथा हमारी ..
दुनिया कहे लाख, कैसे रोते हैं हम...
इन आंसुओं को हमारे, कैसे खुद में ...
ढांप लेते हो तुम,,,
इसी बहाने, तले आसमां, जी भर रो लेते हैं हम ...
और दुनिया समझे, ये बूँदें हैं बारिश की..
गर्द ज़मी है सीने में जो, उसे तुझ से ही धो लेते हैं हम.........रामेश्वरी
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