आज मेरे झरोखे से झांक रहा है चंदा...
कुछ निर्मल सा चेहरा लिए..
सोचती हूँ गले के हार में पिरो लूं उसे...
या सजाऊँ अपने जुड़े में उसे...
या सिरहाने तले अपने रखूँ उसे...
कहानी सुनूँ उनसे जब२ निंद्रा आने लगे....रामेश्वरी
कुछ निर्मल सा चेहरा लिए..
सोचती हूँ गले के हार में पिरो लूं उसे...
या सजाऊँ अपने जुड़े में उसे...
या सिरहाने तले अपने रखूँ उसे...
कहानी सुनूँ उनसे जब२ निंद्रा आने लगे....रामेश्वरी
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