किसने कहा था सच ना बोल...
बेईमानो के बजा ना ढोल...
बंद है किवाड़ अंतरात्मा के..
उनको ना तू खोल...
डकार एक आई ना...
भरा जब पेट, नोटों से मूंह ''खोल खोल...
बोल बोल,,
अब थक गया ना नित नए..
झूठ बोल बोल..
लगे थे बड़े तुझे भी सुहावने...
झूठ के ढोल...
बोल बोल अब झूठ ही बोल...
पाप पुन्य का क्यूँ अब कर रहा ..
हे तू तोल मोल ...
बोल बोल..
था कभी शेर तू ..
गीदड़ की अब खाल ओढ़ ...
अब चाहता है दहाड़ क्यूँ..
बस अब गीदड़ की बोली बोल..
बोल बोल...(रामेश्वरी)
बेईमानो के बजा ना ढोल...
बंद है किवाड़ अंतरात्मा के..
उनको ना तू खोल...
डकार एक आई ना...
भरा जब पेट, नोटों से मूंह ''खोल खोल...
बोल बोल,,
अब थक गया ना नित नए..
झूठ बोल बोल..
लगे थे बड़े तुझे भी सुहावने...
झूठ के ढोल...
बोल बोल अब झूठ ही बोल...
पाप पुन्य का क्यूँ अब कर रहा ..
हे तू तोल मोल ...
बोल बोल..
था कभी शेर तू ..
गीदड़ की अब खाल ओढ़ ...
अब चाहता है दहाड़ क्यूँ..
बस अब गीदड़ की बोली बोल..
बोल बोल...(रामेश्वरी)
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